महिला आरक्षण बिल पर राज्यसभा की मुहर
नई दिल्ली, 10 मार्च(जससे)। भारी हंगामे और शोर-शराबे के बाद आखिरकार राज्यसभा ने ऎतिहासिक महिला आरक्षण बिल पर मुहर लगा दी। 14 साल की लंबी जद्दोजहद के बाद महिला आरक्षण बिल ने अपना पहला महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। इस बिल के समर्थन में 186 सदस्यों ने वोट डाला, जबकि विरोध में सिर्फ एक मत पड़े। इसी के साथ संसद में दो दिन से चल रहे राजनीतिक ड्रामे का भी पटाक्षेप हो गया। भारतीय संसदीय प्रणाली के इतिहास में यह एक नए अध्याय की शुरूआत है। हालांकि, अभी इसे लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से पास होना और राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है।
इससे पहले सदन में दिन भर हंगामा चलता रहा। विरोधी किसी भी प्रकार से बिल को पास नहीं होने देने पर आमदा थे। सभापति ने मार्शलों के जरिए सात निलंबित सांसदों को बाहर का रास्ता दिखाया।
इसके बाद सरकार की सहयोगी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी यू टर्न लिया और बहिष्कार कर गई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी वोटिंग का बहिष्कार किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मांग पर बिल पर बहस कराई गई और उसके बाद वोटिंग की प्रक्रिया संपन्न हुई। इससे पहले हंगामे के बीच राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल एक बार ध्वनिमत से पारित हो गया। लेकिन इस पर मत विभाजन की मांग की गई, जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया। ठीक मत विभाजन से पहले भारतीय जनता पार्टी ने इस पर बहस की मांग को दोहराया। इस पर सभापति ने प्रतिपक्ष के नेता अरूण जेटली को बोलने की अनुमति दे दी और सदन में कई सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए।
भाजपा ने किया बिल का समर्थन
बहस की शुरूआत करते हुए सदन में प्रतिपक्ष के नेता अरूण जेटली ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि भारत के पड़ोसी देशों में जब महिलाओं के लिए आरक्षण है तो भारत में यह क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण में विशिष्ट वर्गो के लिए अलग से आरक्षण की मांग सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दल अपने स्तर पर वर्ग विशेष की महिलाओं को आरक्षण दे सकते हैं।
राजीव गांधी का सपना हुआ साकार
कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जो सपना देखा था वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई से आज पूरा होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिल जिस स्वरूप में पेश किया गया है उसमें कुछ भी गलत नहीं है।
सरपंच पति की स्थितियां नहीं रही
माकपा सांसद वृंदा कारत ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर महिला सरपंचो को लेकर जो स्थिति थी वह अब नहीं रही है। सरपंच पति की व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव हुआ है। महिलाएं खुद आत्मनिर्भर होकर अपने काम को पूरी शिद्दत से अंजाम दे रही है। उन्होंने विरोधियों के तर्को को खारिज करते हुए कहा कि आरक्षण से मुस्लिम, अन्य पिछड़ा वर्ग और एससी व एसटी की महिलाओं को ही फायदा मिलेगा। उन्होंने इस बात को भी गलत बताया कि जो लोग हमेशा के लिए राजनीति में रहना चाहते हैं वह सही नहीं है। हमें दूसरों को भी आगे आने का मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला कोई सुपर वुमन नहीं है कि वह सारी स्थितियां बदल देगी लेकिन उनकी राजनीति में भागीदारी बढ़ने से व्यवस्था में काफी कुछ बदलाव होगा।
50 फीसदी हो आरक्षण
बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र ने बिल पर बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण बिल के पक्ष में है लेकिन उन्होंने मौजूदा स्वरूप में बिल का विरोध किया। मिश्र ने कहा कि 33 फीसदी की जगह महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी बिल के मौजूदा स्वरूप के विरोध में है। बिल में जो कमियां हैं उन्हें दूर किया जाना चाहिए।
मिश्र ने कहा कि जो महिलाएं शोषित व दलित हैं उन्हें आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सवर्ण वर्ग की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल के जरिए उन सीटों को आरक्षित कर दिया जाएगा जो दलितों के लिए पहले से ही आरक्षित है। इस तरह से दलित वर्ग का हक मारने की कोशिश की जा रही है। मिश्र ने मांग की है कि बिल को संशोधन के साथ पेश किया जाए। अगर संशोधन के साथ बिल पेश नहीं किया जाता है तो उनकी पार्टी इसका विरोध करती है।
अल्पसंख्यकों को मिले आरक्षण का लाभ
जनता दल यूनाइटेड के नेता शिवानंद तिवारी ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए चिंता जताई कि बिल के मौजूदा स्वरूप से मुस्लिमों व दलितों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों व पिछड़े वर्ग को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
पिछड़ों व मुस्लिमों को मिले लाभ
राकांपा के नेता तारिक अनवर में बहस में हिस्सा लेते हुए महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। हालांकि अनवर ने भी पिछड़े व मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिए जाने की बात कही।
समर्थन देते तो पहले ही हो जाता पास
भाजपा सांसद नजमा हेपतुल्ला ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार के समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस बिल को लाए थे अगर तब कांग्रेस ने इसका समर्थन किया होता तो तभी पारित हो जाता।
विरोधी गुमराह कर रहे हैं मुस्लिमों को
कांग्रेस सांसद प्रभा ठाकुर ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए कहा दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जो काम अपने हाथ में लिया था उसे अब संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी पूरा करने जा रही है। उन्होंने कहा कि बिल का विरोध करने वाले मुस्लिम वर्ग को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने विरोधियों से सवाल किया कि वे कितनी दलित व मुस्लिम महिलाओं को संसद में लेकर आए हैं।
विपक्ष का शुक्रिया, सदन से माफी मांगी
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करने के लिए विपक्ष का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने सदन में कल हुए हंगामे के लिए माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की में महिलाओं का अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि हर मोर्चे पर महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है।
सपा, बसपा का विरोध
महिला आरक्षण बिल पर सपा ने पहले ही अपना रूख स्पष्ट कर दिया था। बसपा ने भी आज वोटिंग से पहले विरोध जताते हुए बहिष्कार किया। बसपा नेता सतीश चंद्र ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी बिल के मौजूदा स्वरूप का समर्थन नहीं करेगी और वोटिंग में हिस्सा नहीं लेगी।
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