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लोकगीत और लोक संस्कृति को बचाना जरूरी: डॉ. किरण
सिरसा। हरियाणवी लोक संगीत और हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर के विभिन्न पक्षों के संरक्षण और संभाल के लिए कोई विशेष प्रयास आज तक नहीं हुए हैं। यही वजह है कि हमारे लोकगीत और लोकसंस्कृति के कई अमूल्य अंग लुप्त होने की कगार पर पंहुच गए हैं। नई पीढ़ी अपनी जड़ों से कटी-कटी सी नजर आती है। उसका नाचने थिरकने का मन होता है तो वह या तो पंजाबी धुनों की ओर तकती है या फिर पाश्चात्य बीट्स का सहारा लेती है। इस सूरतेहाल में बदलाव लाने के लिए आवश्यक है कि नई पीढ़ी को इस धरोहर के साथ जोडऩे के ठोस उपाय किए जाएं। यह कहना है हरियाणवी लोकसंगीत की विशेषज्ञ और स्थानीय नेशनल कॉलेज में संगीत विभाग की अध्यक्ष डा. किरण ख्यालिया का। डा. ख्यालिया चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो स्टेशन के कॉल-इन शो हैलो सिरसा में केंद्र निदेशक वीरेंद्र सिंह चौहान और पत्रकारिता की छात्रा अपराजिता के साथ बातचीत कर रही थीं। गौरतलब है कि डा. ख्यालिया और उनकी बड़ी बहन सुनीता चौधरी की आवाज में विवाह संस्कार से जुड़े हरियाणवी गीतों पर आधारित धरोहर नामक ऑडियो एलबम हाल ही में रिलीज हुआ है। उन्होंने अपने इस अनूठे एलबम में शामिल गीतों और अपने किस्म की इस पहली एलबम तैयार होने की प्रक्रिया से जड़े श्रोताओं के सवालों के जवाब भी दिए।
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