Editorial
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प्रमोद रिसालिया आज पानी की गंभीर समस्या देख कर तो यही लगता है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए ही होगा। ऐसा नहीं है कि आज हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्य ही पानी की समस्या से जूझ रहे हैं बल्कि समूचा भारत। भारत में ही क्यों पानी की समस्या तो विश्व व्यापी होती जा रही है। प्राचीन काल में पानी के विषय में बात करें तो पानी कुओं, तालाबों, नहरों आदि से दूर-दूर से लाना पड़ता था। उस समय लोग पानी जरूरत के अनुसार ही प्रयोग में लाते थे। अब इसे आलस्य कहें या बुद्धिमानी लेकिन पानी की बर्बादी तो कम होती थी। लेकिन जैसे ही आधुनिक काल आया लोगों के घरों में नल लग गए जिससे लोगों को पानी आसानी से मिलने लगा। पानी इतनी आसानी से मिल जाने के कारण ही पानी की बर्बादी शुरू हुई है। पानी की बर्बादी के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराएं या सरकार को, बात समझ से परे है। शायद हम ही अपनी जिम्मेदारी ठीक ढ़ंग से नहीं निभा सके। हम अपनी सुविधाभोगी जिंदगी के लिए यह भूल गए कि पानी के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? लेकिन सरकार को भी तो अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं फेरना चाहिए था। |
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