Radio Manglam Beta
|
सुमित विर्क व मुकेश जांगड़ा सिरसा के लोगों का चहेता सामुदायिक रेडियो स्टेशन जल्द ही इंटरनेट के माध्यम से देश विदेश में सुना जा सकेगा। स्टेशन के अधिकांश कार्यक्रमों के पोडकास्ट विभाग के वेबसाइट पर उपलब्ध हुआ करेंगे । इस प्रक्रिया का परीक्षण प्रारंभ किया जा चुका है। इसी प्रकार जल्द इस स्टेशन का विधिवत नामकरण भी कर दिया जाएगा। यह जानकारी केंद्र निर्देशक वीरेन्द्र सिंह चौहान ने हैलो सिरसा के समीक्षा विशेषांक में श्रोताओं से बातचीत में दी। कार्यक्रम का संचालन विभाग की प्राध्यापिका रचना सैनी और स्टेशन के नियमित श्रोता सतीश अनेजा ने किया। कार्यक्रम में उन्होंने प्रसारण में अब तक किए गए परिवर्तनों व भविष्य की प्रस्तावित योजनाओं पर विस्तार से बातचीत की। गौरतलब है कि 1 जुलाई 29 से ट्रायल प्रसारण के साथ शुरू हुए इस स्टेशन का 2 अगस्त 29 को मुखयमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा द्वारा विधिवत लोकार्पण किया गया था। स्टेशन से प्रारंभ में रोजाना 1 घंटे कार्यक्रम प्रसारित हो रहे थे। एक जनवरी से प्रसारण अवधि बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया था। वीरेन्द्र सिंह चौहान का कहना था कि अब तक हमारे प्रसारण आदि में परिवर्तन करने में श्रोताओं की भूमिका अहम रही है। नये वर्ष के साथ 14 जनवरी को प्रसारण सीमा को बढ़ाकर ग्यारह घंटे व बीच में एक घंटे का ब्रेक डाला गया है। प्रसारण समय में किया गया यह बदलाव सुबह जल्दी प्रारंभ करने व देर रात 1 बजे तक कार्यक्रम प्रसारण करने के लिए किया गया है जो कि श्रोताओं की मांग थी। इससे लाभ यह हुआ है कि भक्ति वंदना सुबह जल्दी प्रसारित होने लगा व लोगों की दिन के कार्य समाप्त कर रात को कार्यक्रम सुनने की शिकायत भी दूर हो गई। उन्होंने समुदाय के लोगों को स्टेशन देखने आने व कार्यक्रम प्रस्तुत करने का खुला निमंत्रण भी दिया। कार्यक्रम में रेडियो प्रेमी सतीश अनेजा का कहना था कि स्टेशन का कवरेज क्षेत्र बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कुछ इलाके में दूर तक स्टेशन के सिगनल पंहुचने और दूसरी ओर बहुत कम दूरी तक कार्यक्रम सुने जा सकने की बात कही। इस पर केंद्र निर्देशक ने कहा कि रेडियो स्टेशन के टावर पर लगा एंटीना मामूली सा टेढ़ा हो गया है। इसे जल्द दुरूस्त कराया जाएगा। संबंधित कंपनी को इस सिलसिले में लिखा जा चुका है। चौहान ने कहा कि जल्द ही सिरसा के किसानों के लिए पूरी तरह कृषि पर आधारित एक साप्ताहिक कार्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा। इसमें जाने माने कृषि विशेषज्ञों व सफल किसानों को श्रोताओं से रूबरू कराया जाएगा। श्रोताओं की शिकायतों का समाधान करते हुए उन्होंने कहा कि सामुदायिक रेडियो स्टेशन व्यावसायिक एफएम स्टेशनों से भिन्न होते हैं और इन पर फिल्म संगीत के प्रसारण की एक सीमा है। फिलहाल जितना फिल्म संगीत स्टेशन से प्रसारित हो रहा है, उसमें इजाफे की कोई गुंजाइश नहीं है। संगीत की मात्रा अधिक करने के लिए स्थानीय प्रतिभाओं के संगीतमय कार्यक्रमों की रिकाडिर्ंग का सिलसिला प्रारंभ किया गया है और जल्द लोग सिरसा व आसपास के अच्छे कलाकारों के गाए गीत इस केंद्र पर सुन पाएंगे। इस प्रक्रिया में केंद्र पर अधिक संगीत तो सुना ही जा सकेगा ,साथ में क्षेत्र की प्रतिभाओं को अपना हुनर प्रदर्शित करने व उसे सुधारने का मौका भी मिलेगा। एक सवाल के जवाब में केंद्र निदेशक ने बताया कि स्टेशन के कार्यक्रमों की प्रत्येक माह के पहले रविवार को हैलो सिरसा में श्रोताओं के साथ समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त एक नया कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजना है जिसमें सप्ताह भर के कार्यक्रमों में रह गई त्रुटियों की जानकारी चौकन्ने श्रोताओं द्वारा ऑनएयर दी जा सकेगी।
प्रवीण कुमार व चेतन सिंह
जिले के बड़े क्षेत्र में भूजल खारा है। यह जानते हुए भी किसान भूजल का उपयोग खेती के लिए कर रहे हैं। यह अत्यंत घातक प्रवृत्ति है। बजाय नमकीन भूजल के उपयोग के किसानों को चाहिए कि वे ऐसी फसलें उगाएं जिनमें कम पानी से काम चल जाता है। ग्वार, जौ व सरसों इस तरह की फसलें हैं। यह कहना है कि प्रगतिशील किसान और बीजों के उत्पादन में खासा नाम कमाने वाले शमशेर सिंह संधु का। वे सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रम हैलो सिरसा में केंद्र निदेशक वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ क्षेत्र के लोगों से रूबरू हो रहे थे। जिले कें मठदादू निवासी संधू ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से |
इकसठवें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर में आयोजित कविगोष्ठी में नगर के जाने-माने कवियों ने स्वाधीनता और गणतंत्र को समर्पित अपनी रचनाओं का पाठ किया। गोष्ठी का संचालन डा. दर्शन सिंह ने किया जबकि हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार प्रो.रूप देवगुण, गजलकार डा. राज कुमार निजात, सामुदायिक रेडियो के निदेशक निदेशक वीरेन्द्र सिह चौहान व डा. मंजू दलाल ने अपनी रचनाएं पेश की। गोष्ठी का आगाज प्रो. देवगुण ने अपनी इस गजल से किया : इक नई दुनिया रचूंगा, ये कभी सोचा न था। उनके इस शेर को भी खूब सराहा गया : दिन मे इतने काले बादल हम तो रात कहेंगे। प्रो. देवगुण के बाद डा.राज कुमार निजात को काव्यपाठ के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने वतन को समर्पित अपनी रचना तरन्नुम में पेश की : ए वतन, मेरे वतन, प्यारे वतन, उनकी दूसरी रचना ने भी खूब वाहवाही बटोरी : वीर सिपाही हमको तेरे बलिदानों पर मान है। प्रवीण इंसा व चेतन जाने-माने हरियाणवी गायक कर्मबीर फौजी का मानना है कि हरियाणवी पॉप के नाम पर जो कुछ भी हाल ही के बरसों में बाजार में आया है, उसे हरियाणवी संस्कृति, जीवनशैली और बिंबों को प्रदेश व देश की सीमाओं से पार ले जाने और लोकप्रिय बनाने में कामयाबी हासिल की है। साथ ही वे स्वीकार करते हैं कि हरियाणवी एलबमों के बाजार में बहुतायत में अश्लीलता व फूहड़पन की भरमार है। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो पर केंद्र निदेशक वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ हैलो सिरसा कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र के लोगों के साथ रूबरू हुए। युवा गायक ने कहा कि प्रोड्यूसर पैसे कमाने के कारण अश्लीलता को बढ़ावा देते हैं और यह सिलसिला रूकना चाहिए। जेसीडी नेशनल क्रिकेट एकेडेमी के तत्वावधान में यहां चल रहे गली क्रिकेट टूर्नामेंट के सिलसिले में सिरसा आए फौजी की अब तक करीब तीन दर्जन हरियाणवी ऑडियो व वीडियो एलबम रिलीज हो चुकी हैं और वे स्वयं तीन सौ के लगभग हरियाणवी गीत लिख चुके हैं। उन्होंने दर्जनों पुराने लोकगीतों को डीजे बीट्स के अनुरूप ढ़ाल कर नए अंदाज में गाया है और इसे वे समय की आवश्यकता करार देते हैं। कार्यक्रम में सिरसावासियों से बातचीत करते हुए फौजी ने जहां श्रोताओं की फरमाईश पर अपने चुनींदा गीत सुनाए वहीं हरियाणवी लोकसंगीत और हरियाणवी पॉप के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों से ही उनकी रूचि गायन में थी मगर उनके परिजन गायकी को अच्छा काम नहीं मानते थे और इसलिए उनकी इस रूचि का घर में घोर विरोध हुआ। |